56 मिनट पहले रोका गया चंद्रयान-2 मिशन, तकनीकी खामी की वजह से टाली गई लाॅन्चिंग

चंद्रमा की ओर बढते देश के कदम लाॅन्च व्हीकल में तकनीकी खामी की वजह से फिलहाल थम गए हैं । आज सुबह 2.51 बजे श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण होना था लेकिन लाॅन्चिग के 56 मिनट पहले तकनिकी खामी की वजह से इसे रोकना पडा ।

इसरो ने इस बात की जानकारी देते हुए टवीट किया प्रक्षेपण प्रणाली में टी-56 मिनट पर तकनीकी खामी दिखी । एहतियात के तौर पर चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण आज के लिए टाल दिया गया हैं । नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी और इस महत्वपुर्ण मिशन को अंजाम दिया जाएगा । इसके साथ ही भारत पहली बार चंद्रमा पर दस्तक देगा । ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा । दुनिया में अंतरिक्ष महाशक्ति कहलाने वाले भारत के लिए यह बडी उपलब्धि होगी ।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो द्वारा भेजे गए मिशन चंद्रयान-1 को चंद्रमा पर पानी खोजने में मिली सफलता के 11 वर्ष बाद चंद्रयान-2 से भारत सहित पूरे विश्व को डेरों उम्मीदें हैं । अतंरिक्ष एजेंसी ने इससे पहले प्रक्षेपण की तारीख जनवरी के पहले सप्ताह में रखी थी लेकिन बाद में इसे बदलकर 15 जुलाई कर दिया था ।

चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण देखने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी थे । मिशन से पहले इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने कहा था कि हमारे काम का सबसे बडा उददेश्य देश, समाज और वैज्ञानिक समुदाय के लिए लाभकारी चीजें तैयार करना हैं । हम पुरानी हासिल ख्यातियों के भरोसे नहीं रहना चाहते बल्कि हम भविष्य की ओर देखते हुए उन चुनौतियों की पहचान करना चाहते हैं जो हमारे काम में आडे आ सकती हैं । इस प्रकार के मिशन के बारे में सोचने और उसे क्रियान्वन करने में काफी मेहनत और समन्वय की जरूरत होती हैं ।

इसके अलावा इसरो के पुर्व अध्यक्ष राधाकृष्णन ने कहा कि चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर पहला रोबोटिक मिशन हैं । 6 हजार किमी प्रति घंटे की गति से चंद्रमा की परिक्रमा करते लैंडर विक्रम को अपने वेग पर नियंत्रण पाकर चंदमा की अनिश्चितता भरी सतह पर साॅप्ट लैंडिंग करनी होगी । 16 मिनट में यह सब होगा इसी वजह से यह बेहद जटिल और दुष्कर भी हैं ।

देश इस मिशन को देख रहा हैं दूसरी ओर भारत मानव को अंतरिक्ष में भेजने और ग्रहों के अन्वेषण के मुहाने पर खडा हैं, यह हमारी नई पीढी और भविष्य के लिए चुनौतियों भरा हैं लेकिन भारी संभावनाओं को खेलेगा ।

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